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क्या सूरज माली षड्यंत्र का हो पाएगा पर्दाफाश?

विपक्ष ना होता तो क्या सूरज माली को मिल पाता न्याय??

क्या सूरज माली षड्यंत्र का हो पाएगा पर्दाफाश…? 13 दिन बाद समझौते से खत्म हुआ धरना

“गहलोत से लेकर बेनीवाल तक का दबाव, भाजपा पर उठे सवाल”

राजस्थान/चित्तौड़गढ़/कपासन:- आमजन के लिए पानी की माँग कर राजेश्वर तालाब को भरने को लेकर कपासन कस्बे के 20 वर्षीय युवक सूरज माली पर 15 सितंबर की शाम हुए हमले के बाद शुरू हुआ धरना-आंदोलन आखिरकार 13 दिन बाद 28 सितंबर की रात समझौते के साथ समाप्त हुआ। सांसद हनुमान बेनीवाल की चित्तौड़ कूच करने की चेतावनी के बाद प्रशाशन अलर्ट मोड में आ गया था। भारी जन आंदोलन और विपक्ष के कड़े दबाव के चलते आखिरकार सूरज को अब न्याय की आस बंधी है। अब सूरज माली प्रकरण का एसओजी द्वारा जांच की जाएंगी, वही सूरज माली के अस्पताल का खर्च सरकार उठायेगी और उपचार कराएगी। कपासन के इस घटनाक्रम ने भाजपा सरकार की संवेदनशीलता, प्रशासन की कार्यशैली और विपक्ष की सक्रियता पर बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है।

कपासन की उप नगरीय बस्ती भूपालखेड़ा निवासी सूरज माली ने पिछले दिनों नगर के राजेश्वर तालाब में पानी लाने का चुनावी वादा याद दिलाने के लिए कपासन विधायक को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया था। इसके बाद 15 सितंबर को सूरज माली अपने दोस्त के साथ फैक्ट्री से काम करके लौट रहा था, तभी कुछ नकाबपोश हमलावरों ने स्कॉर्पियो गाड़ी सूरज की बाइक के सामने लगाकर लोहे के सरियों और पाइप से जानलेवा हमला कर दिया। सूरज के दोनों पैरों में कई फ्रैक्चर और आंतरिक चोटें आई। सूरज माली पर जानलेवा हमले के बाद उदयपुर और उसके बाद गंभीर हालत में उसे अहमदाबाद के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जहां सूरज माली जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। सूरज माली ने कपासन से भाजपा के विधायक अर्जुन लाल जीनगर के इशारे पर हमला होने का आरोप लगाया था। इसके बाद यह मामला हाई प्रोफाइल हो गया। जन आंदोलन के चलते , विपक्ष के कांग्रेस नेता पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल के कूच के चलते 13 दिन से धरना-प्रदर्शन चला, पुलिस ने मुख्य आरोपी व उसके कुछ साथियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।

बेनीवाल की जबरदस्त एंट्री और दबाव के आगे झुका प्रशासन और सरकार

शनिवार को नागौर सांसद व राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल कपासन पहुंचे और धरना-प्रदर्शन का मोर्चा संभालते हुए सूरज के परिजनों व लोगों की मांगें पूरी करने की बात आगे बढ़ाते हुए इस मामले में राज्य सरकार को घेरा था। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गई तो रविवार को चित्तौड़गढ़ कूच किया जाएगा और कलक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन होगा। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी इस चेतावनी के बाद अलर्ट मोड पर आ गए। यहां कलक्ट्रेट के बाहर बेरिकेट्स लगा दिए गए और पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी ने भारी संख्या में पुलिस बल को ब्रिफिंग करते हुए निर्देश दिए कि किसी भी हालत में कानून-व्यवस्था नहीं बिगड़नी चाहिए।

रविवार को सुबह अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रशासन प्रभा गौतम और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुख्यालय सरिता सिंह कपासन पहुंचे। वहां पर्याप्त जाप्ता तैनात किया गया। सरकार की तरफ से एडीएम, एएसपी ने सांसद बेनीवाल व उसके परिजनों के साथ वार्ता शुरू की। अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रशासन चित्तौड़गढ़ प्रभा गौतम व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जिला मुख्यालय सरिता सिंह ने बताया कि वार्ता में सूरज माली के परिवार से एक व्यक्ति को संविदा पर नौकरी देने, 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, नगर पालिका क्षेत्र में सूरज के परिवार को दुकान का आवंटन करने, पूरे मामले की जांच एसओजी से करवाने, सूरज के उपचार पर खर्च होने वाली पूरी राशि का पुनर्भरण करने के साथ ही संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर मामले की जांच करवाने पर सहमति बनी है। इसके बाद धरना-प्रदर्शन समाप्त हो गया है। इससे पहले सांसद बेनीवाल ने धरने को संबोधित किया था।

गहलोत, धीरज गुर्जर और हनुमान बेनीवाल जैसे मजबूत विपक्ष की एंट्री

कांग्रेस पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री सहित बड़े नेताओं की एंट्री से सूरज माली प्रकरण ने कपासन से अहमदाबाद तक इस घटना ने प्रदेश राजनीति को गर्मा दिया। 21 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कपासन पहुँचे थे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और धरना स्थल पर मौजूद भीड़ को संबोधित करते हुए भाजपा सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए। गहलोत ने कहा- “सरकार तब जागती है जब हालात बिगड़ जाते हैं। जनता की पीड़ा को समय रहते समझना सरकार की जिम्मेदारी थी।” गहलोत ने परिवार को भरोसा दिलाया कि ‘कांग्रेस हमेशा आपके साथ है, न्याय दिलाने की लड़ाई हम पूरी ताकत से लड़ेंगे।’ इधर कांग्रेस नेता धीरज गुर्जर भी सूरज के जनांदोलन में शामिल हुए और जनता को संबोधित किया, वही हनुमान बेनीवाल की मौजूदगी ने प्रशासन को वार्ता की टेबल पर आने के लिए मजबूर किया।

13 दिन बाद समझौता और प्रशासन की घोषणाएँ,  ऐसे खत्म हुआ धरना प्रदर्शन

आखिरकार 28 सितंबर की रात प्रशासन, विपक्ष और जन आंदोलनकारियों में समझौता हुआ। मुख्य बिंदु-सूरज माली को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।परिवार के एक सदस्य को संविदा नौकरी मिलेगी। सूरज की बहन को सब्जी मंडी में दुकान आवंटित की जाएगी।सूरज का पूरा इलाज सरकार वहन करेगी। मामले की जांच एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) को सौंपी जाएगी। इन घोषणाओं के बाद धरना समाप्त कर दिया गया।

सूरज माली प्रकरण में जांच और गिरफ्तारियाँ

पानी की मांग जैसा वादा, कपासन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक को वादा याद दिलाने पर जानलेवा हमला सूरज माली हाइ प्रोफाइल बने इस प्रकरण में पुलिस ने अब तक इस हमले में शामिल 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 27 सितंबर को मुख्य आरोपी किशनलाल गुर्जर को उत्तराखंड से पकड़ा गया। उसे पनाह देने वाले 4 अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया।

जनता के कटघरे में भाजपा, धूमिल हुई पार्टी की छवि

यह पूरा घटनाक्रम भाजपा सरकार पर कई सवाल छोड़ गया। स्थायी पानी की समस्या वर्षों से जस की तस बनी हुई है, चुनावी वादों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला।युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश सोशल मीडिया पर सक्रिय सूरज माली पर हमला जनता में असुरक्षा की भावना जगाता है। नेतृत्व की अनुपस्थिति आंदोलन को शांत कराने के लिए भाजपा का कोई बड़ा नेता सामने नहीं आया; उल्टे विपक्षी नेताओं को पहल करनी पड़ी।13 दिन लंबा धरना दिखाता है कि प्रशासन जनता की संवेदनाओं को समय रहते समझने में नाकाम रहा।

सूरज माली प्रकरण अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि राजस्थान की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। जिसने भाजपा को जनता के कटघरे में खड़ा कर दिया है। सूत्रों की माने तो राजस्थान में भाजपा राज जैसा कुछ लग नहीं रहा है। यहां जनता ज्यादा त्रस्त और परेशान है। ऐसा लगता है राजस्थान में गुंडों, भूमाफियाओं और बजरी माफियाओं का राज चल रहा है, कानून का इकबाल खत्म हो गया है। धरना भले थम गया हो, लेकिन जनता के बीच यह सवाल कायम है-‘अगर विपक्ष और भरी जनांदोलन न होता तो क्या सूरज माली को न्याय मिल पाता..?? सवाल यह भी है कि क्या इस असली षड्यंत्र का पर्दाफाश हो पाएगा ? बड़ा सवाल यह भी है कि क्या भाजपा आने वाले चुनावों में अपनी सीटे कायम रख पाएगी या होगा बड़ा सत्ता परिवर्तन कांग्रेस पार्टी तो दावे करती दिखाई दे रही है कि राजस्थान में फिर कांग्रेस की सरकार होगी, जनता को बीजेपी का राज रास नहीं आ रहा है, आज ही चुनाव करवा ले जनता बदलाव चाह रही है…..।

By: Durgesh Kumar Lakshkar

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