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अपने ही राज में परेशान “भाजपा” कार्यकर्ता, पार्टी के लोगों को ही न्याय नहीं दिलवा पा रहे

सहकारिता मंत्री के गृह जिले में बह रही उल्टी गंगा

 सहकारिता मंत्री के गृह जिले में बह रही उल्टी गंगा

चित्तौड़गढ़, राजस्थान। पिछले काफी दिनों से अखबारों और सोशल मीडिया की सुर्खियां बन चुका चित्तौड़गढ़ का सहकारिता विभाग रोज नए नए आयाम स्थापित कर रहा है और रोज नियम विरुध्द तरीके से काम करने के नए नए खुलासे सामने आ रहे हैं इस विभाग के सभी कर्मचारी और स्वयं मंत्री गौतम दक भी मौन और मूकदर्शक बन कर सब कुछ देख रहे हैं।

कुछ दिनों पुर्व सहकारिता के एक अखबार के मुखपत्र में एक खबर छपी थी जिसमें रजिस्ट्रार मंजू राजपाल के नाक के नीचे अपैक्स बैंक के एमडी संजय पाठक द्वारा की जा रही मनमानी को उजागर किया गया था। ऐसा ही मनमानी और नियम कानून को ताक पर रखकर कार्य करने का वाकया सहकारिता मंत्री के स्वयं के गृह जिले चित्तौड़गढ़ में भी दिखाई दे रहा है और इसकी सम्पूर्ण जानकारी मंत्री गौतम दक को होते हुए भी मन्त्री दक मौन रहकर अधिकारियों की मनमानी और नियम विरुध्द कृत्यों को मौन सहमति देते प्रतीत होते है।

सहकारिता मन्त्री गौतम दक के गृह जिले के बहुचर्चित प्रकरण कारुण्डा ग्राम सेवा सहकारी समिति लि. में गबन के प्रकरण में भूतपूर्व व्यवस्थापक पारस मल जैन के खिलाफ राजनीतिक द्वेषता के चलते राजस्थान सहकारी संस्था अधिनियम 2001 की धारा 57(1) की जाँच विचाराधीन रहते हुए नियत तारीख पेशी 6 अगस्त 2020 की सुनवाई किए बिना 4 अगस्त 2020 को कूटरचित दस्तावेज व आदेश तैयार करके मिथ्या तथ्य अंकित कर के पुलिस थाना सदर निम्बाहेड़ा में एक एफआईआर दर्ज करवाई गई।किन्तु पारसमल जैन दस्तावेजो और सबूतों के आधार पर कांग्रेस सरकार में ही 2022 में सहकारिता विभाग की कोर्ट में विभागीय जांच एवं पुलिस थाना सदर निम्बाहेड़ा की पुलिस जांच दोनों में निर्दोष साबित हो गया।उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां चित्तौड़गढ़ द्वारा उक्त प्रकरण में दिनाँक 16-03-2022 को निर्णय जारी कर दिया गया पुलिस द्वारा 20-07-2022 को एफआर लगा दी गई जिसे न्यायालय द्वारा स्वीकार करके दिनाँक 13-08-2022 को लोक अदालत में डिस्पोज कर दिया और माननीय उच्च न्यायालय जोधपुर द्वारा भी दिनाँक 28-09-2022 को इस एफआर को रिकॉर्ड पर ले लिया गया।वही दूसरी तरफ न्यायालय उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां चित्तौड़गढ़ द्वारा जारी निर्णय दिनाँक 16-03-2022 की कारुण्डा समिति द्वारा विधिवत अनुपालना भी 30-07-2022 को कर दी गई जिसमें भूतपूर्व व्यवस्थापक पारस मल जैन की समिति से 989523/-रुपये की लेनदारी निकली जिसकी तात्कालिक व्यवस्थापक प्रकाश चंद्र जैन ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के आधार पर प्राप्ति रसीद भी दी।इसके बाद भूतपूर्व व्यवस्थापक द्वारा कारुण्डा समिति,चित्तौड़गढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक लि.,स्पेशल ऑडिटर सहकारी समितियां चित्तौड़गढ़ और उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां चित्तौड़गढ़ के 7 अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ एक प्रकरण न्यायालय की शरण लेकर भा.द.स.की धारा 467,468,471,472,420,409 और 120 बी में पुलिस थाना सदर निम्बाहेड़ा में दर्ज करवाया गया जो न्यायालय में विचाराधीन हैं।इसके बाद जब भूतपूर्व व्यवस्थापक पारसमल जैन द्वारा अपने विधिविरुद्द तरीके से रोक कर रखे गए वेतन,समस्त सेवानिवृत्ति परिलाभों एवं लेनदारी की बैंक से माँग की तो संजय पाठक की तरह ही चित्तौड़गढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक लि.के सत्ता के गलियारों में अच्छी पकड़ रखने वाले एक पॉवरफुल अधिकारी अपना लक्ष्य पूरा नही होते देख बौखला गए और नियम कानून से परे जाकर इन जाँचो से सहमत नहीं हुए और पुलिस जाँच के खिलाफ स्वयं ने निगरानी प्रस्तुत कर दी और समिति पर दबाव बनाकर एक बार फिर सत्ता के गलियारों से नजदीकी का उपयोग करते हुए अधिकारियों पर दबाव बनाकर अपील की तय समय सीमा निकल जाने के बाद लगभग 362 दिनों बाद मिथ्या दस्तावेज तैयार करवाकर अतिरिक्त रजिस्ट्रार अपील्स सहकारी समितियां अपील्स जोधपुर में उक्त जांरी निर्णय दिनाँक 16-03-2022 के खिलाफ निर्णय की जानकारी नही होने जैसे मिथ्या तथ्यों के आधार पर देरी माफी का लाभ लेकर एक अपील प्रस्तुत करवाकर एकतरफा स्थगन आदेश भी दिलवा दिया जो वर्तमान में न्यायालय अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारी समितियां जोधपुर में विचाराधीन हैं किन्तु इस विचाराधीन अपील में अपील दर्ज होने की दिनाँक 21-03-2023 से ही नियत तारीख पेशियों पर लगातार अपीलार्थी समिति और प्रतिवादी सँख्या 1 उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां चित्तौड़गढ़ अनुपस्थित चल रहे हैं और कई बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद भी उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां चित्तौड़गढ़ द्वारा आज दिनाँक तक भी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जा रहा हैं।

उप रजिस्ट्रार चित्तौड़गढ़ ने बहा डाली उल्टी गंगा

अपने विभाग के अधिकारियों के द्वारा बहाइ जाने वाली उल्टी गंगा को देखकर शायद चित्तौड़गढ़ के तात्कालिक उप रजिस्ट्रार महोदय भी अपने आप को नहीं रोक पाए और अपने साथी अधिकारियों की तरह ही चित्तौड़गढ़ में भी उल्टी गंगा बहा दी और *अतिरिक्त रजिस्ट्रार अपील्स सहकारी समितियां जोधपुर* में कारुण्डा समिति द्वारा दायर अपील सँख्या 02/2023 में माननीय न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश जारी होते हुए व इस विचारधीन अपील में स्वयं के प्रतिवादी एक होते हुए बैंक के उसी पावरफुल अधिकारी के दबाव में नियम कानून से परे जाकर वित्तीय वर्ष की जानकारी बिना ही दिनाँक 11-08-2023 को आदेश क्रमांक 447-452 जारी करके इस आदेश क्रमांक 447-452 दिनाँक 11-08-2023 के सम्बंध में चित्तौड़गढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक लि.एमडी द्वारा अतिरिक्त रजिस्ट्रार अपील्स सहकारी समितियां जोधपुर को दिनाँक 14-08-2023 को पत्र लिखकर माननीय उच्च न्यायालय जोधपुर में केविएट भी प्रस्तुत करवाई गई ताकि पारसमल जैन स्थगन आदेश प्राप्त नही कर पाए।उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां चित्तौड़गढ़ द्वारा नियम कानून से परे जाकर मनमर्जी से जारी इस आदेश क्रमांक 447-452 दिनाँक 11-08-2023 द्वारा पारसमल जैन के खिलाफ पुनःगबन व वित्तीय अनियमितता की जांच शुरू करके जाँच पूर्ण करके एक और निर्णय जारी कर दिया जबकि पारसमल जैन इस जाँच को शुरू किए जाने के 7 वर्ष 3 माह और 11 दिन पूर्व सेवानिवृत हो चुके हैं और नियमानुसार किसी कर्मचारी के सेवानिवृति के 6 साल बाद उसके खिलाफ किसी तरह के गबन या वित्तीय अनियमितता का कोई प्रकरण दर्ज करके जाँच शुरू नही की जा सकती है किन्तु यहाँ प्रकरण दर्ज करके आनन फानन में जाँच पूर्ण करके दिनाँक 15-12-2023 को निर्णय भी जारी कर दिया और निर्णय जारी किए किए जाने के बाद सूचना के अधिकार में दिनाँक 18-12-2023 को 447-452 दिनाँक 11-08-2023 जारी करने से ही इनकार कर दिया।यदि उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां चित्तौड़गढ़ द्वारा उक्त आदेश जारी नही किया गया तो बैंक के एमडी को यह आदेश कैसे और कहाँ से प्राप्त हुआ जिसके लिए एमडी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जोधपुर में केविएट किस आधार पर प्रस्तुत की गई।यह गहन जाँच का विषय हैं।

फिर भी सहकारिता मंत्री हैं मौन

ऊपरी न्यायालय अतिरिक्त रजिस्ट्रार अपील्स सहकारी समितियां जोधपुर में अपील विचाराधीन होते हुए भी नियमो को ताक पर रखते हुए उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां चित्तौड़गढ़ द्वारा नियम कानून से परे जाकर मनमर्जी पुनः जांच शुरू करते हुए निर्णय जारी कर दिया और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस नियम विरुद्ध की गई जांच में पारस मल जैन से विधिवत नोटिस ही तामील नही हुए औऱ वे इस जाँच में शामिल ही नहीं हुए।इन सब तथ्यों की जानकारी सहकारिता मंत्री गौतम दक को कारुण्डा के भूतपूर्व सेवानिवृत्त व्यवस्थापक पारस मल जैन द्वारा दस्तावेजों सहित रजिस्टर्ड डाक से चार बार भेज दी है परंतु मंत्री जी का लक्ष्य अपने ही गृह जिले में अपने ही विभाग के नियम कानून ताक पर रखकर मनमर्जी की कार्यवाहियां करने वाले अधिकारियों द्वारा बहाइ जा रही उल्टी गंगा को ओर अधिक गति से बहाने में सहयोग करने के अलावा कुछ नहीं किया जा रहा है।आखिर ऐसा क्या कारण है जो सहकारिता मन्त्री जी मीडिया के सामने हमेशा जीरो टॉलरेंस के दावे करते हैं वो लगातार अपने ही गृह जिले में अपने ही विभाग के अधिकारियों द्वारा नियम कानून को ताक में रखकर मननर्जी से नियमविरुद्द कार्यवाहियां करने के लिए आए दिन अखबारों में छप रही खबरों के बावजूद भी चित्तौड़गढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक लि.,उप रजिस्ट्रार व स्पेशल ऑडिटर सहकारी समितियां चित्तौड़गढ़ के अधिकारियों के कारनामो के सम्बन्ध में छप रही खबरों और इनके खिलाफ प्राप्त लिखित शिकायत मय प्रमाणित दस्तावेज व सबूत सहित प्राप्त होने के बावजूद भी इनके खिलाफ नियमानुसार निष्पक्ष जाँच व कार्यवाही करने की बजाय शिकायत को अनदेखा कर इनको मौन स्वीकृति देते प्रतीत हो रहे हैं।

सत्ता परिवर्तन के बाद भी अधिकारी यही कार्यरत

गत कांग्रेस सरकार के समय चित्तौड़गढ़ जिले में कार्यरत अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा तत्त्कालिक सत्ता के कर्ता धर्ता के इशारे और दबाव में कई नियमविरुद्द कार्य सम्पादित किए गए जिसमें उप रजिस्ट्रार और स्पेशल ऑडिटर कार्यालय से जुड़े कर्मचारी शामिल रहे थे क्योंकि इन दोनों कार्यालयों से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी ही सभी सहकारी संस्थाओं के निर्माण,चुनाव, निर्वाचन, ऑडिट, गबन व वित्तीय अनियमितता के प्रकरणों की जाँच का कार्य सम्पादित करते हैं।कांग्रेस राज में भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा उनके परिवार जनों और रिश्तेदारों के खिलाफ झूठे गबन व वित्तीय अनियमितता के प्रकरण दर्ज करने की सैंकड़ो अधिकारियों कर्मचारियों के नामजद शिकायतें भाजपा नेताओं को दी गई थीं वहीं दूसरी तरफ सहकारी समितियों और डेयरी चुनाव की धांधलियों के सम्बन्ध में भी धांधली में शामिल अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ नामजद शिकायतें तात्कालिक भाजपा जिलाध्यक्ष गौतम दक सहित अन्य भाजपा नेताओं को शिकायतें प्राप्त हुई थी जिस पर जिलाध्यक्ष गौतम दक सहित भाजपा के सभी बड़े नेताओं ने सरकार बनने पर निष्पक्ष जाँच करवाकर सख्त कार्यवाही करने के आश्वासन भाजपा कार्यकर्ताओं को दिया था किन्तु वो कहावत है न कि नेता की बात पर और गधे की लात पर कभी विश्वास नही करना चाहिए ठीक वही चित्तौड़गढ़ के कार्यकर्ताओं के साथ होता दिख रहा हैं कि विपक्ष में पार्टी के जिलाध्यक्ष रहते सरकार बनने पर इन अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ जाँच व कार्यवाही का आश्वासन देने वाले तात्कालिक जिलाध्यक्ष गौतम दक के ही सहकारिता मंत्री बन जाने के बाद कांग्रेस राज में भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवार जनों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर परेशान प्रताड़ित करने वाले और सहकारी समितियों व डेयरी के चुनाव में सत्ता के दबाव में जमकर धांधली करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ निष्पक्ष जाँच व कार्यवाही तो बहुत दूर की बात नजर आ रही हैं सरकार बनने के डेढ़ साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद भी उन सभी कांग्रेसी एजेन्ट अधिकारियों का आज तक भी चित्तौड़गढ़ से ट्रांसफर तक नही किया गया हैं वे सभी अधिकारी आज भी भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने सीना ठोक कर चैलेंज करते दिख रहे हैं जिससे भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में रोष और नाराजगी देखने की मिलने लगी हैं।

Reporter:- Rajendra Singh Shekhawat 

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