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सांवरिया सेठजी के खजाने पर बुरी नजर, लुटेरों के मंसूबों पर फिरा पानी… कोर्ट ने दिया आदेश

सांवरिया सेठजी के खजाने पर बुरी नजर, लुटेरों के मंसूबों पर फिरा पानी… कोर्ट ने दिया आदेश…

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चित्तौड़गढ़ राजस्थान। सांवरिया सेठ मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जहां भगवान कृष्ण के सांवले रूप को पूजा जाता है। मंदिर में दानपात्र में अक्सर करोड़ों रुपये जमा होते हैं, जिसे मंदिर प्रशासन द्वारा विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यों में उपयोग किया जाता है। लेकिन कुछ संस्थाओं और राजनीतिक लोगों ने सांवरिया सेठ जी के चढ़ावे की दौलत को मनमाने ढंग से अन्यत्र दुरुपयोग करने की मांग कर डाली। सांवरिया सेठजी की भंडार की दौलत के दुरूपयोग पर स्थाई रूप से रोक लगाने के लिए वर्ष 2018 में मंडफिया न्यायालय में वाद दायर किया गया था। जिस पर जज साहब ने निर्णय सुनाते हुए चढ़ावे की राशि को अब मनमाने तरीके से बोर्ड के प्रावधानों के विपरित बाहरी क्षेत्रों में खर्च करने पर न्यायालय ने पूरी तरह से रोक लगा दी है।

17 नवंबर 2025 सोमवार को मंडफिया के सिविल न्यायाधीश विकास कुमार ने इस संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया और जिसके अनुरूप मंदिर मंडल को पाबंद किया गया है। बतादे की सांवलिया सेठ जी के भंडार की 18 करोड़ रूपये की राशि मुख्यमंत्री बजट घोषणा की पूर्ति के लिए स्वीकृत की गई थी। उसी दौरान मंडफिया न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। जानकारी के अनुसार न्यायालय में प्रार्थी मदन जैन, कैलाशचन्द्र डाड, श्रवण तिवारी, शीतल डाड सहित अन्य लोगों ने एक याचिका मंडफिया न्यायालय में प्रस्तुत कि थी। इसमें बताया कि सांवलिया सेठ जी के मंदिर में करोड़ों की राशि भक्तों द्वारा चढ़ाई जाती है। इस चढ़ावे की राशि का मंदिर मंडल द्वारा मनमाने तरीके से दुरूपयोग किया जा रहा है। जिसे लेकर स्थानीय निवासियों और भक्तों द्वारा रोकने के लिए ज्ञापन आदि दिये गए और कई प्रयास किये लेकिन राजनीतिक दबाव और निजी हितों के चलते मंदिर मंडल की और भक्तों द्वारा चढ़ाई गई राशि का दुरूपयोग किया जा रहा था। 

वादीगणों ने सांवलिया जी मंदिर मंडल द्वारा मातृकुंडिया तीर्थस्थल विकास के लिए राज्य सरकार की बजट घोषणा के अनुरूप 18 करोड़ की राशि जारी करने का प्रस्ताव लिया गया था, लेकिन वाद दायर होने के बाद न्यायालय ने इस पर सुनवाई करते हुए अस्थाई निषेधाज्ञा जारी की थी वहीं मंदिर मंडल के अधिनियम 1992 की धारा 28 के प्रावधानों के प्रतिकूल होने पर इसे निरस्त किया गया है। वहीं सांवलिया मंदिर मंडल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अध्यक्ष को स्थाई निषेधाज्ञा से पाबंद किया गया है कि वे इस प्रस्ताव के अनुसरण में कोई राशि जारी नहीं करे। वहीं न्यायालय ने आदेश जारी किया कि सांवलिया मंदिर मंडल बोर्ड सांवलिया मंदिर मंडल अधिनियम 1992 की धारा 28 में वर्णित प्रावधानों से परे जाकर मंदिर निधि का किसी भी प्रकार से किसी भी रूप में दुरूपयोग नहीं करें। 

“सरकार की सम्पत्ति नहीं सांवरिया सेठजी की दौलत मंदिर का भंडार”

न्यायालय ने अपने निर्णय में 5 विवादक बिन्दुओं का उल्लेख करते हुए स्पष्ट तौर पर कहा कि है कि सांवलियाजी मंदिर मंडल की सम्पत्ति सरकार का खजाना नहीं होकर मंदिर के देवता सांवरिया सेठजी की सम्पत्ति है। इसका उपयोग किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए नहीं किया जा सकता है। मंदिर मंडल की ओर से यदि मंदिर की सम्पत्ति का दुरूपयोग किया जाता है, तो यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी का कृत्य होते हुए आपराधिक न्याय भंग के अपराध का गठन करता है। मंदिर निधि के दुरूपयोग किए जाने पर न्यायालय के आदेश की अवमानना का मामला दर्ज कराया जा सकेगा। वहीं इनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

“गोशालाओं के लिए की थी अनुदान की मांग”

कुछ दिनों पूर्व सांवलियाजी मंदिर के भंडार से जिले की विभिन्न गोशालाओं के लिए कई संस्थाओं, राजनीतिज्ञ व्यक्तियों और विभिन्न धर्मगुरुओं ने सांवरिया मंदिर मंडल से सांवरिया सेठजी की दौलत की मांग की थी। इसे लेकर बड़ी संख्या में गोशाला संचालक, राजनीतिक नेताओं व अन्य ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। वहीं इससे पहले कांग्रेस शासन में देवस्थान मंत्री ने भी क्षेत्र की गोशालाओं में राशि ले जाने का प्रयास किया था, लेकिन विरोध के चलते यह राशि नहीं गई थी। अब इस निर्णय के बाद ऐसे सभी प्रयासों पर रोक लग गई है। वहीं सांवरिया सेठजी के खजाने पर नजर गढ़ाए लोगों के मंसूबों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। 

 “श्रद्धालुओं की सुविधाओं का किया था उल्लेख”

मंदिर मंडल की ओर से बोर्ड के प्रावधानों के विपरित भक्तों के चढ़ावे की राशि का दुरूपयोग करने के मामले में दायर याचिका में वादीगणों ने कहा कि मंदिर और आस-पास के गांवों में व्यवस्थाओं का नितांत अभाव है। उन्होंने इसमें दर्शनार्थियों भक्तों के लिए निशुल्क भोजनशाला, पार्किंग, शौचालय, पेयजल, चिकित्सा सेवा आदि का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मूलभूत सुविधाओं की लम्बे समय से मांग की जा रही है। वहीं एक उच्च स्तरीय अस्पताल, विद्यालय, लाइब्रेरी और पार्क जैसी सुविधाओं के लिए भी स्थानीय लोग प्रयासरत थे। वादीगणों ने कहा कि मंदिर मंडल की ओर से बाहरी क्षेत्र में राजनीतिक लाभ के लिए इस प्रकार की राशि जारी की जा रही है।

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