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हिंदुस्तान जिंक के प्रस्तावित फर्टिलाइजर प्लांट को ग्रामीणों ने सिरे से नकारा, पीड़ित ग्रामीणों ने कहा खाद प्लांट नहीं चाहिए नहीं चाहिए, हमें जीने दो।

भारी हंगामे के बीच जनसुनवाई विफल

जनसुनवाई या जन-धोखा? हिंदुस्तान जिंक के प्रस्तावित फर्टिलाइजर प्लांट को ग्रामीणों ने सिरे से नकारा, भारी हंगामे के बीच जनसुनवाई विफल, पीड़ित ग्रामीणों ने कहा खाद प्लांट नहीं चाहिए नहीं चाहिए, हमें जीने दो।

चित्तौडगढ़, राजस्थान। गंगरार उपखंड के पुठोली स्थित हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में लगने वाले खाद फर्टिलाइजर प्लांट की पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु जनसुनवाई आज आजोलिया का खेड़ा स्थित सगरा माता मंदिर प्रांगण में आयोजित की गई। हिंदुस्तान जिंक के प्रस्तावित फर्टिलाइजर प्लांट की जनसुनवाई पूरी तरह विवादों के साये में रही। प्रदूषण की मार झेल रहे हजारों ग्रामीणों, युवाओं और बुजुर्गों के प्रचंड विरोध के कारण प्रशासन और कंपनी का यह आयोजन विफल साबित हुआ। पीड़ित ग्रामीणों ने जनसुनवाई की शुरुआत से लेकर अंत प्रभावित गांवों के लोगों ने एक स्वर में गर्जना की- “हमें विकास नहीं, शुद्ध हवा और पानी चाहिए।” इसलिए हमें खाद प्लांट नहीं चाहिए नहीं चाहिए। 

 प्रभावित गांवों का सामूहिक बहिष्कार और आक्रोश 

पुठोली, आजोलिया का खेड़ा, बिलिया, नगरी, धोरडिया, मूंगा का खेड़ा, सुवानीया गांवों के पीड़ित ग्रामीणों ने मंच से अपना दर्द बयां किया। जहां जनसुनवाई में टोटल 39 लोगों ने अपनी आवाज उठाई उनमें से 33 लोगों ने हिंदुस्तान जिंक के खिलाफ वीडियो कैमरे के सामने अपना दर्द बयां किया तो 6 लोगों ने हिंदुस्तान जिंक के समर्थन में अपनी बात खी जो पर्यावरण विभाग के पास रिकॉर्ड में मौजूद है। ग्रामीणों ने दो-टूक कहा कि मौजूदा प्लांटों ने पहले ही खेती को बंजर और हवा, पानी को जहरीला बना दिया है, पानी पानी पाताल छू रहा है। हमें न रोजगार का लालच चाहिए और न ही झूठा विकास, हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए सिर्फ जीने लायक वातावरण चाहिए। हम हाथ जोड़ते है हमें जीने दो।

ग्राम सभाओं का ऐतिहासिक प्रस्ताव रिकॉर्ड पर

जनसुनवाई के दौरान आजोलियों का खेड़ा और पुठोली ग्राम पंचायतों ‌द्वारा आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में पारित विरोध प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड में लिया गया। पंचायतों के इस वैधानिक विरोध ने कंपनी के दावों की हवा निकाल दी।

पेड भीड़’ और षड्यंत्र का पर्दाफाश

जनसुनवाई में उस समय तनाव चरम पर पहुँच गया जब ग्रामीणों ने कंपनी मैनेजमेंट पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया। स्थानीय युवाओं का दावा है कि कंपनी ने विरोध दबाने के लिए अपने कर्मचारियों लाभप्रद लोगो और कुछ महिलाओं को पैसे देकर ‘प्रायोजित समर्थन’ के लिए खड़ा किया था। युवाओं के तीखे विरोध के बाद प्रशासन को चेतावनी दी गई कि बाहरी लोगों के बयानों को जनभावना न माना जाए।

सरपंच (प्रशासक) के ‘दोहरे चरित्र’ पर फूटा गुस्सा

जनसुनवाई में ग्रामीणों द्वारा पुठोली प्रशासक (सरपंच) महिपाल सिंह के खिलाफ गहरा रोष देखा गया। आरोप है कि गुप्त बैठक विशेष ग्रामसभा में ग्रामीणों के साथ खड़े होने की कसम खाने वाले सरपंच ने जनसुनवाई के मंच पर पहुँचते ही अपना स्टैंड बदल लिया और कंपनी के पक्ष में सुर में सुर मिलाए। ग्रामीणों ने इसे “जनता की सेहत का सौदा और बड़ा विश्वासघात करार दिया।

युवाओं का अल्टीमेटमः “आर-पार की लड़ाई”

पुठोली, आजोलिया का खेड़ा, बिलिया,मूंगा का खेड़ा, सुवानिया के ग्रामीण युवाओं की एकता ने स्पष्ट कर दिया कि यह लड़ाई गांवों के अस्तित्व की है, जिंदगी और मौत को है। प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि इस विवादित जनसुनवाई के आधार पर प्लांट को मंजूरी दी गई, तो क्षेत्र में उग्र जन-आंदोलन शुरू होगा। ग्रामीणों ने तिल-तिल कर मरने के बजाय जिला प्रशासन के सामने सामूहिक आत्मदाह तक की चेतावनी दे डाली। अब यह तो आने वाला वक्त बताएगा कि प्रशासन, सेंट्रल कमेटी, मंत्रालय इस पर क्या संज्ञान लेता है…? क्या हिंदुस्तान जिंक को खाद प्लांट की पर्यावरणीय स्वीकृति मिलेगी, ग्रामीणों को तिल तिल कर मरना पड़ेगा या ग्रामीणों, पशु, पक्षी जानवरों, जल, जंगल, जमीन पर हर कोई प्रदूषण मुक्त वातावरण में शांति से अपना जीवन यापन कर पाएगा..?

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