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जेके सीमेंट की खदान परियोजना पर जनसुनवाई में भारी बवाल, ग्रामीणों ने कहा- मर जाएंगे, पर जमीन नहीं देंगे, विकास के नाम पर विनाश मंजूर नहीं

जेके सीमेंट खदान परियोजना मामला

विकास के नाम पर विनाश मंजूर नहीं: जेके सीमेंट की खदान परियोजना पर जनसुनवाई में भारी बवाल, ग्रामीणों ने कहा- मर जाएंगे, पर जमीन नहीं देंगे

चित्तौड़गढ़, राजस्थान। जेके सीमेंट लिमिटेड (निंबाहेड़ा) की प्रस्तावित चंदा खेड़ी लाइमस्टोन ब्लॉक खनन परियोजना मंगलवार को बेगूं उपखंड के उत्थेन कला गांव में ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करते हुए विवादों में घिर गई। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा आयोजित जनसुनवाई में सैकड़ों किसानों, महिलाओं और युवाओं ने परियोजना को सिरे से खारिज कर पर्यावरणीय स्वीकृति तत्काल निरस्त करने की मांग की।

“खेती छीनकर मजदूर बनाना चाहते हैं”

जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें “विकास के नाम पर विनाश” स्वीकार नहीं है। ग्रामीणों का कहना था कि क्षेत्र की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि और पशुपालन पर टिकी है। खदान परियोजना लागू होने से न केवल उनकी उपजाऊ जमीन छिन जाएगी, बल्कि धूल और प्रदूषण से खेती-बाड़ी पूरी तरह चौपट हो जाएगी। कई बुजुर्ग किसानों ने मंच से भावुक होकर कहा, “मर जाएंगे लेकिन अपनी जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं देंगे। यह धरती हमारी मां है।”

पर्यावरण और वन्यजीवों पर खतरा

विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित खदान क्षेत्र के आसपास सघन वन क्षेत्र है। परियोजना के लिए सैकड़ों वर्ष पुराने पेड़ काटे जाएंगे और चरनोट भूमि भी प्रभावित होगी। इससे क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने के साथ-साथ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी उजड़ जाएगा। ग्रामीणों ने चेताया कि खनन शुरू होने पर पूरा इलाका प्रदूषण की चपेट में आ जाएगा, जिसका सीधा असर आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।

 

प्रशासन पर भी उठे सवाल

जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि उन्हें यह कहकर बुलाया गया था कि जिला कलेक्टर स्वयं मौजूद रहेंगे, लेकिन मौके पर केवल गंगरार उपखंड अधिकारी ही उपस्थित थे। इसे लेकर ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की।

“सुनवाई एकपक्षीय, निर्णय नहीं मिला”

ग्रामीणों ने मौके पर ही परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति निरस्त करने की मांग रखी। इस पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि जनसुनवाई में दर्ज सभी आपत्तियां और सुझाव भारत सरकार को भेजे जाएंगे। हालांकि ग्रामीण हाथोंहाथ निर्णय पर अड़े रहे। काफी देर तक चली बहस और हंगामे के बाद जनसुनवाई समाप्त कर दी गई।

आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट निर्णय लिए बिना ही प्रक्रिया पूरी कर दी गई। जनसुनवाई के बाद भी ग्रामीणों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परियोजना को स्वीकृति देने का प्रयास किया गया तो क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

क्या है परियोजना?

मैसर्स जे. के. सीमेंट लिमिटेड द्वारा चंदाखेड़ी लाईम स्टोन ब्लॉक खनन परियोजना, क्षेत्रफल-741.00 हेक्टेयर, उत्पादन क्षमता 40 लाख टन प्रति वर्ष एवं 1500 टी.पी.एच. क्षमता के क्रेशर की स्थापना निकट ग्रामः चंदाखेड़ी, ठुकराल, पारखीया खेडी, पालका, उत्थेन कलां, देवरिया, धारला, शादी एवं रायता, तहसील बेगूं, जिला-चित्तौड़गढ़ (राज.) में प्रस्तावित है। जेके सीमेंट लिमिटेड चित्तौड़गढ़ जिले के इस क्षेत्र में लाइमस्टोन खनन के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति चाहती है। इसके लिए जनसुनवाई एक अनिवार्य प्रक्रिया है।

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