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हाथी भाटा आश्रम में गूंजा सर्व समाज का हुंकार: ‘श्री राष्ट्रीय करणी सेना मेवाड़’ का गठन, जनसेवा को मिली नई उड़ान

हाथी भाटा आश्रम में गूंजा सर्व समाज का हुंकार: ‘श्री राष्ट्रीय करणी सेना मेवाड़’ का गठन, जनसेवा को मिली नई उड़ान

भीलवाड़ा, राजस्थान। अजमेर-चित्तौड़गढ़ हाईवे पर स्थित हाथी भाटा आश्रम रविवार को सर्व समाज के संकल्प का केंद्र बन गया। यहां सामाजिक कार्यकर्ता *बबलू सिंह ठुमिया* के नेतृत्व में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में मेवाड़ भर से उमड़े समाजसेवियों ने एक स्वर में कहा – “अब सेवा ही राजनीति है और एकता ही शक्ति है।”

बैठक की सबसे बड़ी घोषणा ‘श्री राष्ट्रीय करणी सेना मेवाड़’ के गठन की रही। इसका उद्देश्य अब सिर्फ एक समाज नहीं, बल्कि पूरे मेवाड़ की जनसेवा, गौसंरक्षण और युवा मार्गदर्शन को नई दिशा देना है।

संतों के सानिध्य में दीप से शुरू हुआ संकल्प

कार्यक्रम का शुभारंभ आश्रम के पीठाधीश्वर महंत संत दास जी महाराज और कठिया वाले बाबा बनवारी शरण जी महाराज के करकमलों से दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। संतों ने कहा कि जब समाज संगठित होता है तो राष्ट्र मजबूत होता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे मोबाइल से ज्यादा मैदान में उतरकर समाज का काम करें।

बबलू सिंह ठुमिया: “हर वर्ग साथ होगा, हर मुद्दा उठेगा”

बैठक को संबोधित करते हुए बबलू सिंह ठुमिया ने कहा कि यह मंच किसी एक जाति या वर्ग का नहीं है। यह मेवाड़ की मिट्टी की आवाज है।

उन्होंने 5 सूत्रीय एजेंडा रखा:

1. गौसेवा 2. शिक्षा और नशा मुक्ति 3. पर्यावरण संरक्षण 4. गरीब कन्या विवाह 5. युवा शक्ति का संगठन

उन्होंने कहा, “हम सुझाव मांगने नहीं, सुझाव लेकर आए हैं। अब हर गांव में करणी सेना की टोली बनेगी जो बिना भेदभाव सेवा करेगी।”

जनप्रतिनिधि और समाजजन एक मंच पर

बैठक में हमीरगढ़ राव हर्ष प्रदीप सिंह, हुरड़ा प्रधान कृष्ण सिंह, चित्तौड़ प्रधान देवेंद्र कंवर, कल्पना कंवर राठौड़ शाहपुरा, वीरेंद्र सिंह सोलंकी, सरला कंवर, गजेंद्र सिंह अमरगढ़, गोविंद कंवर सहित सैकड़ों करणी सैनिक और सर्व समाज के लोग मौजूद रहे।

सभी वक्ताओं ने एक ही बात दोहराई – “अब फूट नहीं, फौज चाहिए। फौज सेवा की।”

बैठक के अंत में हाथी भाटा आश्रम से यह संकल्प लिया गया कि हर महीने एक सामाजिक बैठक होगी और हर तिमाही में एक बड़ा सेवा कार्य किया जाएगा।

हाथी भाटा की इस बैठक ने साबित कर दिया कि बबलू सिंह ठुमिया के नेतृत्व में मेवाड़ अब बिखराव नहीं, बल्कि एकजुट होकर विकास और सेवा की नई इबारत लिखेगा।

 

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