
एल्यूमिनियम किंग वेदांता के अनिल अग्रवाल पर FIR छत्तीसगढ़ में बॉयलर फटने से 20 लोगों की मौत के बाद FIR दर्ज
छत्तीसगढ़ के एक पावर प्लांट में बॉयलर फटने से 20 मज़दूरों की मौत और कई अन्य के घायल होने के बाद, वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और अन्य अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
अनिल अग्रवाल के खिलाफ FIR में किन कानूनी धाराओं का ज़िक्र किया गया है?
वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ दर्ज पहली सूचना रिपोर्ट (FIR) में भारतीय न्याय संहिता की धारा 106, 289 और 3(5) का ज़िक्र किया गया है। छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले में एक पावर प्लांट में बॉयलर फटने की घटना के बाद ये कानूनी धाराएं लगाई गईं, जिसमें 20 मज़दूरों की मौत हो गई थी।
सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के अनुसार, धारा 106 लापरवाही से मौत का कारण बनने से संबंधित है, जबकि धारा 289 मशीनों के संबंध में लापरवाही भरे आचरण से जुड़ी है। धारा 3(5) को आरोपियों के बीच ‘साझा इरादे’ (common intention) को संबोधित करने के लिए शामिल किया गया था, जिसमें कंपनी के मैनेजर देवेंद्र पटेल और अन्य अधिकारी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि मुख्य बॉयलर इंस्पेक्टर और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी द्वारा की गई शुरुआती जांच में यह पाया गया कि अत्यधिक ईंधन जमा होने और दबाव बढ़ने के कारण यह धमाका हुआ।
छत्तीसगढ़ बॉयलर धमाके की जाँच से यह साबित हुआ कि वेदांता पावर प्लांट में हुई इस औद्योगिक दुर्घटना की सीधी वजह भारी लापरवाही और रखरखाव में हुई चूक थी। अधिकारियों ने पाया कि कंपनी और उसके कॉन्ट्रैक्टर, NGSL, ने ऑपरेशनल मानकों का पालन नहीं किया, जिसके कारण मशीनरी के अंदर जानलेवा दबाव बन गया।
पुलिस ने बताया कि शुरुआती तकनीकी जाँच से पता चला है कि बॉयलर की भट्टी के अंदर बहुत ज़्यादा ईंधन जमा हो जाने की वजह से धमाका हुआ। इससे एक हाई-प्रेशर वाली स्टीम ट्यूब फट गई, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। इस दुर्घटना में सक्ती ज़िले में 20 मज़दूरों की मौत हो गई और 16 अन्य घायल हो गए।
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ लापरवाही से मौत का कारण बनने के आरोप में FIR दर्ज की गई है। जाँचकर्ताओं ने बॉयलर के दबाव में अचानक आए उतार-चढ़ाव और उपकरणों के रखरखाव में हुई नाकामी को आपराधिक आरोपों के मुख्य सबूत के तौर पर पेश किया है।
छत्तीसगढ़ बॉयलर धमाके की जाँच से यह साबित हुआ कि वेदांता पावर प्लांट में हुई इस औद्योगिक दुर्घटना की सीधी वजह भारी लापरवाही और रखरखाव में हुई चूक थी। अधिकारियों ने पाया कि कंपनी और उसके कॉन्ट्रैक्टर, NGSL, ने ऑपरेशनल मानकों का पालन नहीं किया, जिसके कारण मशीनरी के अंदर जानलेवा दबाव बन गया।
पुलिस ने बताया कि शुरुआती तकनीकी जाँच से पता चला है कि बॉयलर की भट्टी के अंदर बहुत ज़्यादा ईंधन जमा हो जाने की वजह से धमाका हुआ। इससे एक हाई-प्रेशर वाली स्टीम ट्यूब फट गई, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। इस दुर्घटना में सक्ती ज़िले में 20 मज़दूरों की मौत हो गई और 16 अन्य घायल हो गए।
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ लापरवाही से मौत का कारण बनने के आरोप में FIR दर्ज की गई है। जाँचकर्ताओं ने बॉयलर के दबाव में अचानक आए उतार-चढ़ाव और उपकरणों के रखरखाव में हुई नाकामी को आपराधिक आरोपों के मुख्य सबूत के तौर पर पेश किया है।




