
पत्रकार को धमकी देना SHO को पड़ा भारी, राजपाल सिंह को कोर्ट की फटकार, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित प्रतापनगर थाने के थानाधिकारी राजपाल सिंह को एक पत्रकार को धमकी देना भारी पड़ गया। अदालत ने प्रतापनगर थाने के SHO राजपाल सिंह को फटकार लगाते हुए जांच अधिकारी को प्रथम दृष्टया दोषी माना है। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ती फरजंद अली ने अनिल राठी बनाम राजस्थान सरकार (एसबी क्रिमिनल रिट पिटिशन नं. 1546/2026) में सुनवाई करते हुए भीलवाड़ा पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है।
दरअसल जानकारी के अनुसार आपको बता दे कि पत्रकार अनिल राठी का आरोप है कि सोशल मीडिया पर उनकी एक टिप्पणी से नाराज होकर थाना प्रभारी ने उन्हें अपशब्द कहे और गोली मारने की धमकी दी। राठी ने तुरंत पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी।
कोर्ट के सख्त निर्देश: DGP और गृह सचिव को हस्तक्षेप का आदेश
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अली ने राजस्थान पुलिस के डीजीपी और गृह सचिव को मामले में सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ संकेत दिया कि पुलिस अधिकारियों द्वारा इस तरह का व्यवहार गंभीर है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
SHO पर कार्रवाई की अनुशंसा, नोटिस में बदलाव
अदालत ने SHO के खिलाफ जारी 17 सीसी नोटिस को 16 सीसी में परिवर्तित करने का आदेश दिया है। साथ ही, सीआई राजपाल सिंह को जिले से बाहर करने की अनुशंसा भी की गई है। यह कदम विभागीय अनुशासन और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अगली सुनवाई 8 मई को, जांच रिपोर्ट तलब
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 मई तय करते हुए विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले SHO को 23 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया था।
SHO ने की न्यायालय के आदेश की अवहेलना पर सख्ती
राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर पीठ द्वारा दिनांक 10 अप्रैल को आदेश पारित कर SHO राजपाल सिंह को हाजिर होने हेतु नोटिस जारी किया गया था और 23 अप्रैल की तारीख नियत की गई थी। लेकिन निर्धारित तिथि पर SHO राजपाल सिंह न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए, उनके स्थान पर सीओ सिटी सज्जन सिंह पेश हुए। इस पर न्यायालय ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट कहा कि जब किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाता है, तो उसकी अनुपस्थिति गंभीर विषय है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप, कहा है पुलिस की जवाबदेही..?
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों और आदेशों के बाद भीलवाड़ा पुलिस महकमे में हड़कंप जैसे हालात बन गए हैं। इस कार्रवाई को कानून व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। यह मामला न सिर्फ एक पत्रकार को दी गई धमकी का है, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और आम नागरिकों की सुरक्षा से भी जुड़ा है।



